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नवंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ओ भी क्या दिन था

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 शादी में डोंगा-सिस्टम बफेट सिस्टम खाने में वो आनंद कहाँ जो पंगत में आता था.. - पहले जगह रोकना... अब बिना फटे पत्तल डॉनों को छांटना! उतारे हुए जूते चप्पलों पर नजर रखना...! - फिर पत्तल पे ग्लास रखकर उसे उड़ने से रोकना! - नमक रखने वाले को जगह बताना यहां रखो नमक.. साथ में सब्जी देने वाले को गाइड करना हिला के दे या तरी तरी देना! - मुँह बड़े से टूक से भरा है तो उँगलियों से इशारे करते हुए दो-दो लड्डू और गुलाब जामुन रखवा लेना.. साथ में पूड़ियाँ गरम गरम और छाँट-छाँट के रखवाना!. - पीछे वाली पंगत में झांक के देखना क्या क्या आ गया और अपने इधर और क्या बाकी है.. जो बाकी है उसके लिए आवाज लगाना! - बगल में बैठे फूफाजी के पत्तल में जबरदस्ती पूडी रखवाना..  - रायते वाले को दूर से आता देख फटाफट रायते को पी डालना! - पहले वाली पंगत कितनी देर में उठेगी। उसके हिसाब से बैठने की पोजीशन बना लेना और आखिर में पानी वाले को खोजना। - खाने के बाद अगर शंका हो की पेट अभी भी नहीं भरा या कोई आइटम छूट गया तो अगली पंक्ति के कोने में फिर से बैठ जाना!👏👏

भारतीय कि प्राचीन वैदिक सभ्यता

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 छठ....     जब विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता की स्त्रियां अपने सम्पूर्ण वैभव के साथ सज-धज कर अपने आँचल में फल ले कर निकलती हैं तो लगता है जैसे संस्कृति स्वयं समय को चुनौती देती हुई कह रही हो, "देखो! तुम्हारे असँख्य झंझावातों को सहन करने के बाद भी हमारा वैभव कम नहीं हुआ है, हम सनातन हैं, हम भारत हैं। हम तबसे हैं जबसे तुम हो, और जबतक तुम रहोगे तबतक हम भी रहेंगे।"       जब घुटने भर जल में खड़ी व्रती की सिपुलि में बालक सूर्य की किरणें उतरती हैं तो लगता है जैसे स्वयं सूर्य बालक बन कर उसकी गोद में खेलने उतरे हैं। स्त्री का सबसे भव्य, सबसे वैभवशाली स्वरूप वही है। इस धरा को "भारत माता" कहने वाले बुजुर्ग के मन में स्त्री का यही स्वरूप रहा होगा। कभी ध्यान से देखिएगा छठ के दिन जल में खड़े हो कर सूर्य को अर्घ दे रही किसी स्त्री को, आपके मन में मोह नहीं श्रद्धा उपजेगी।       छठ वह प्राचीन पर्व है जिसमें राजा और रंक एक घाट पर माथा टेकते हैं, एक देवता को अर्घ देते हैं, और एक बराबर आशीर्वाद पाते हैं। धन और पद का लोभ मनुष्य को मनुष्य से दूर करता है, पर धर्म उन्ह...