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🚩 ब्राह्मण🚩

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ब्राह्मण में ऐसा क्या है कि सारी दुनिया ब्राह्मण के पीछे पड़ी है। इसका उत्तर इस प्रकार है। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदासजी ने लिखा है कि भगवान श्री राम जी ने श्री परशुराम जी से कहा कि  → "देव  एक  गुन  धनुष  हमारे।  नौ गुन  परम  पुनीत तुम्हारे।।" हे प्रभु हम क्षत्रिय हैं हमारे पास एक ही गुण अर्थात धनुष ही है आप ब्राह्मण हैं आप में परम पवित्र 9 गुण है- ब्राह्मण_के_नौ_गुण :- रिजुः तपस्वी सन्तोषी क्षमाशीलो जितेन्द्रियः। दाता शूरो दयालुश्च ब्राह्मणो नवभिर्गुणैः।। ● रिजुः = सरल हो, ● तपस्वी = तप करनेवाला हो, ● संतोषी= मेहनत की कमाई पर  सन्तुष्ट, रहनेवाला हो, ● क्षमाशीलो = क्षमा करनेवाला हो, ● जितेन्द्रियः = इन्द्रियों को वश में रखनेवाला हो, ● दाता= दान करनेवाला हो, ● शूर = बहादुर हो, ● दयालुश्च= सब पर दया करनेवाला हो, ● ब्रह्मज्ञानी,         श्रीमद् भगवत गीता के 18वें अध्याय के 42श्लोक में भी ब्राह्मण के 9 गुण इस प्रकार बताए गये हैं- " शमो दमस्तप: शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च। ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्म कर्म स्वभावजम्...
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जय श्री कृष्ण

पुरानी विरासत

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  #विरसत              हल खींचते समय  यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था  तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके  बैल के मल-मूत्र त्यागने तक खड़ा रहता था  ताकि बैल आराम से यह नित्यकर्म कर सके,  यह आम चलन था। हमनें यह सारी बातें बचपन में  स्वयं अपनी आंखों से देखी हुई हैं।  जीवों के प्रति यह गहरी संवेदना  उन महान पुरखों में जन्मजात होती थी  जिन्हें आजकल हम अशिक्षित कहते हैं,  यह सब अभी 25-30 वर्ष पूर्व तक होता रहा । उस जमाने का देशी घी  यदि आजकल के हिसाब से मूल्य लगाएं  तो इतना शुद्ध होता था कि   2 हजार रुपये किलो तक बिक सकता है। और उस देसी घी को  किसान विशेष कार्य के दिनों में  हर दो दिन बाद आधा-आधा किलो घी  अपने बैलों को पिलाता था ।  टटीरी नामक पक्षी अपने अंडे  खुले खेत की मिट्टी पर देती है  और उनको सेती है। हल चलाते समय  यदि सामने कहीं कोई टटीरी चिल्लाती मिलती थी  तो किसान इशारा समझ जाता था  और उस अंडे वाली जगह को...

रामचरित मानस

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 सुप्रभात मंगलमय हो सियावर राजा रामचंद्र की जय पवनसुत हनुमान जी महराज की जय                   अस कहि करत दंडवत देखा,                       तुरत उठे प्रभु हरष बिसेषा॥ दीन बचन सुनि प्रभु मन भावा,    भुज बिसाल गहि हृदय लगावा॥         अनुज सहित मिलि ढिग बैठारी,              बोले बचन भगत भयहारी॥ कहुं लंकेश सहित परिवारा, कुसल कुठाहर बास तुम्हारा॥ खल मंडली बसहुं दिनु राती, सखा धरम निबहइ केहि भांती॥                                मैं जानउं तुम्हारि सब रीती,                                    अति नय निपुन न भाव अनीती॥                                       बरु भल बास नर...

करनेवाल कोई और

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 प्रारब्ध फल       एक सड़क पर बड़ी तेज धूप थी | उस पर एक बैलगाड़ी अपनी मन्द गति से चली जा रही थी | गाड़ी पर बहुत सा बोझा लदा हुआ था | गाड़ीवान भी मस्त गाड़ी पर छाया करके आराम कर रहा था | सुनसान सड़क पर कहीं से एक कुत्ता आ गया | वह भी उसी ओर जा रहा था जिधर को गाड़ी जा रही थी | कुत्ते को जब तेज धूप लगने लगी तो सोचा कि कैसे धूप की गर्मी से बचा जाय | तो कुत्ते ने सोचा कि इसी बैलगाड़ी के नीचे हो जांय तो धूप न लगेगी |       कुत्ता बैलगाड़ी के नीचे हो गया | अब बैलगाड़ी अपनी गति से जा रही थी | कुत्ता भी उसी गति से गाड़ी के नीचे नीचे उसकी छाया में जा रहा था | कुछ देर तक इसी प्रकार चलते चलते कुत्ते को लगने लगा कि वह खुद पूरी बैलगाड़ी को अपने ऊपर लिए हुए है | वह खुद पूरा बोझ उठाये हुये है | वह खुद सारे बोझ के साथ चल रहा है वह खुद बोझ से दबा जा रहा है |       जब इस प्रकार की भावना के वशीभूत कुत्ता चल रहा था तभी वह बैल के पैरों के निकट पहुँच गया | बैल ने जो एक लात मरी तो कुत्ता छटक कर दूर जा गिरा | पें पें चिल्लाने लगा | तब उसने देखा कि गाड़ी तो अब भ...

मन की उडान

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 बहुत समय पहले की बात है , एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये ।  वे बड़े ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे।  राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।   जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था।   राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी शानदार लग रहे थे ।  राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हें उड़ने का इशारा करो ।  “ आदमी ने ऐसा ही किया।   इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ  गया जिससे वो उड़ा था।   ये देख ,राजा को कुछ अजीब लगा.“ क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”,राजा ने सवाल किया।  ” जी हुजूर ,इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है , वो इस डाल को छोड़ता...