भागीरथी जय मा गंगा
#गंगा_दशहरा ,,,,

वैशाख शुक्ल सप्तमी को जन्मी मां गंगाजी 33 दिन बाद कैलाश पर विराजे भगवान शंकर के जटाजूटों से निकलकर आज ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को धरती पर पहुंची ।
मानव जाति को तारती , उद्धारती मां लाखों वर्षों से बह रहीं ,,,,,,,,, निरन्तर ,,,,,अनवरत,,,,,
रसायन बहा रहे , गन्दगी डाल रहे मनुष्य को क्षमा करती , बुहारती , दुलारती ,,,,,
उन्हें भी संवारती , जिन्होंने मां का सीना चीर कर खनिज निकाल लिए ,,,,,उन्हें भी जिन्होंने उसकी रेती को खंगाल कर महल बना लिए,,,,
उन्हें भी , जिन्होंने उनके शीतल जल में सुलगते जहाज उतार दिए ,,,,,उन्हें भी जिन्होंने उन्हें बोतलों में बंद कर बाजार सजा लिए,,,,,,,
वे बह रही हैं सतत ,,,दिन रात , त्रेता से द्वापर होते हुए कलयुग तक,,,,,,,,
तो , आइये , गंगा दशहरे पर मां के पतितपावन जल में गोते लगाएं,,,,, दूर हों , तो वहीं से उनका स्मरण करें,,
गंगा दशमी की अनन्त शुभकामनाएं स्वीकारिये ,,,,,,

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