परिश्रम
क्या आपने कभी किसान को परिश्रम करते देखा है यदि नहीं देखा है तो देखिए गौर से उसका अध्ययन कीजिए आप पाएंगे कि वह कठोर से कठोर परिश्रम करता है थक पर बुरी तरह टूट जाता है किंतु तब भी मुस्कुराता रहता है थकने पर भी व थकने का नाम नहीं लेता कभी नहीं कहता कि मैं थक गया हूं परिश्रम करने के बाद जब वह अपने किए काम पर नजर डालता है तो संतोष की मुस्कान उसके होंठों पर थिरकने लगती है जब वह अपने खेत में हरी भरी फसल देखता है तो उसका रोम-रोम मुस्कुराने लगता है वह सारी तकलीफ है भूल जाता है इसलिए कहते हैं परिश्रम का फल मीठा होता है
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