#विरसत हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके बैल के मल-मूत्र त्यागने तक खड़ा रहता था ताकि बैल आराम से यह नित्यकर्म कर सके, यह आम चलन था। हमनें यह सारी बातें बचपन में स्वयं अपनी आंखों से देखी हुई हैं। जीवों के प्रति यह गहरी संवेदना उन महान पुरखों में जन्मजात होती थी जिन्हें आजकल हम अशिक्षित कहते हैं, यह सब अभी 25-30 वर्ष पूर्व तक होता रहा । उस जमाने का देशी घी यदि आजकल के हिसाब से मूल्य लगाएं तो इतना शुद्ध होता था कि 2 हजार रुपये किलो तक बिक सकता है। और उस देसी घी को किसान विशेष कार्य के दिनों में हर दो दिन बाद आधा-आधा किलो घी अपने बैलों को पिलाता था । टटीरी नामक पक्षी अपने अंडे खुले खेत की मिट्टी पर देती है और उनको सेती है। हल चलाते समय यदि सामने कहीं कोई टटीरी चिल्लाती मिलती थी तो किसान इशारा समझ जाता था और उस अंडे वाली जगह को...
हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए निराश हीन भावना हमरा जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है इसलिए हमेंशा सपने बडे देखो लछ बडे रखो इरादे विशाल होना चाहिए जितना आप अपने आप को जानते है उतना और कोई नही जानता है परमानन्द चतुर्बेदी
प्रारब्ध फल एक सड़क पर बड़ी तेज धूप थी | उस पर एक बैलगाड़ी अपनी मन्द गति से चली जा रही थी | गाड़ी पर बहुत सा बोझा लदा हुआ था | गाड़ीवान भी मस्त गाड़ी पर छाया करके आराम कर रहा था | सुनसान सड़क पर कहीं से एक कुत्ता आ गया | वह भी उसी ओर जा रहा था जिधर को गाड़ी जा रही थी | कुत्ते को जब तेज धूप लगने लगी तो सोचा कि कैसे धूप की गर्मी से बचा जाय | तो कुत्ते ने सोचा कि इसी बैलगाड़ी के नीचे हो जांय तो धूप न लगेगी | कुत्ता बैलगाड़ी के नीचे हो गया | अब बैलगाड़ी अपनी गति से जा रही थी | कुत्ता भी उसी गति से गाड़ी के नीचे नीचे उसकी छाया में जा रहा था | कुछ देर तक इसी प्रकार चलते चलते कुत्ते को लगने लगा कि वह खुद पूरी बैलगाड़ी को अपने ऊपर लिए हुए है | वह खुद पूरा बोझ उठाये हुये है | वह खुद सारे बोझ के साथ चल रहा है वह खुद बोझ से दबा जा रहा है | जब इस प्रकार की भावना के वशीभूत कुत्ता चल रहा था तभी वह बैल के पैरों के निकट पहुँच गया | बैल ने जो एक लात मरी तो कुत्ता छटक कर दूर जा गिरा | पें पें चिल्लाने लगा | तब उसने देखा कि गाड़ी तो अब भ...
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