गाय के दूध का महत्व

 वेद का एक भाग आयुर्वेद में गो चिकित्सा का विस्तृत वर्णन है। पंचगव्य आयुर्वेद का प्राण तत्व है ।

आहार शास्त्र के अनुसार अन्न शरीर में मात्र रात्रि तक, दूध सात रात्रि तक, दही 20 रात्रि तक और गोघृत 30 रात्रि तक मनुष्य के शरीर में अपना पोषणकारी प्रभाव बनाए रखता है।


अन्न खाने से रस रक्त मांस मेद मज्जा अस्थि और वीर्य ये सप्तधातु बनने में लगभग 56 दिन लगते हैं मगर गो गव्योंके सेवन से तुरंत सप्त धातु की निर्माण प्रक्रिया शुरू हो जाती है।


मानव के अंग प्रत्यंग मांस मज्जा चर्म एवं अस्थि में स्थित विकारों का नाश महाऔषधि पंचगव्य के सेवन से पूर्णतया होता है।

इसमें इतनी ज्यादा शक्ति समाहित होती है कि भयंकर से भयंकर असाध्य से असाध्य रोग बीमारियों को भी जड़ से समाप्त करने का सामर्थ्य ये महाऔषधि रखती है।

इन गो गव्यों की एक विशेष बात यह है कि इसका कोई दुष्प्रभाव साइड इफेक्ट नहीं होता है।

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